सीयूएसबी के प्रोफ़ेसर सुरेश चंद्र के साहित्य पर केन्द्रित पुस्तकों का अलीगढ़ में हुआ लोकार्पण

 

शिक्षाविद् एवं दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में भाषा एवं साहित्य पीठ के अधिष्ठाता प्रोफ़ेसर सुरेश चन्द्र के साहित्य पर केन्द्रित दो ग्रन्थों  का लोकार्पण उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में हुआ | कार्यक्रम का आयोजन साहित्य संस्थान प्रकाशन, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के बैनर तले किया गया जिसमें "परख का दर्शन", लेखक- रघुवीर सिंह अरविंद एवं "कलम का योद्धा", संपादक- डॉ.उमेश कुमार सिंह का लोकार्पण किया गया | अपने उद्बोधन में प्रोफ़ेसर सुरेश चन्द्र ने अपने संबोधन में कलम के महत्तव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजनीति समाज को जोड़ती है और साहित्य समाज को जोड़ता है। प्रोफ़ेसर चन्द्र ने उपस्थित श्रोताओं को आश्वस्त किया कि वे अपनी कलम की ताकत का प्रयोग समाज को जोड़ने वाले साहित्य के सर्जन के लिए करते रहेंगे। इस ग्रन्थ लोकार्पण समारोह में सीयूएसबी  के हिन्दी विभाग के तीन शोधार्थियों (नचिकेता वत्स, रुद्र चरण माझी और सोनाली राजपूत) ने भाग लिया। नचिकेता वत्स ने अपने संबोधन में कहा कि मैं अपने गुरुदेव के शहर में आकर गौरवान्वित हूँ। नचिकेता वत्स ने प्रोफ़ेसर सुरेश चन्द्र की बहुआयामी हिन्दी सेवा से उपस्थित जनों को अवगत कराया।

 

कार्यक्रम में अलीगढ़ मंडल के आयुक्त आई॰ए॰एस॰ श्री गौरव दयाल, लखनऊ से पधारे पूर्व उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व डी॰आई॰जी॰ आई॰पी॰एस॰ श्री उदय प्रताप,अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर रमेश रावत, इलाहाबाद से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार श्रीप्रकाश मिश्र, दिल्ली से पधारे वरिष्ठ समाजसेवी श्री ओ. पी. गौतम, डॉ. रक्षपाल सिंह, श्री अशोक सक्सेना के हाथों संपन्न हुआ। उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर रमेश रावत ने की जबकि मंच संचालन पी॰ एल॰ पीपल द्वारा किया गया।

 

उक्त अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आयुक्त श्री गौरव दयाल जी ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्यिक कार्यक्रम जीवित समाज की पहचान है। समाज को दिशा देने केलिए साहित्य का गतिशील होना आवश्यक है। पढ़ने पर जोड़ देते हुए उन्होंने कहा कि मैं स्वयं समय निकाल कर प्रोफ़ेसर सुरेश चन्द्र जी के ग्रन्थों को पढ़ूँगा एवं अपनी प्रतिक्रिया भी दूँगा। साथ ही उन्होंने प्रोफ़ेसर सुरेश चन्द्र जी के साहित्यिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि निश्चित रूप से अहिंदी भाषा क्षेत्र के राज्यों में हिंदी का अलख जगाने में सुरेश जी का योगदान महत्वपूर्ण है।

 

उदय प्रताप जी ने कहा कि साहित्य और समाज का गहरा नाता है। इस साहित्यिक कार्यक्रम का हिस्सा बनकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। प्रोफ़ेसर सुरेश चन्द्र जी की रचनाएं समाज को दिशा देने का काम करेंगी इसका मुझे भरोसा है। इलाहाबाद से आए वरिष्ठ साहित्यकार श्रीप्रकाश मिश्र जी ने प्रोफ़ेसर सुरेश चन्द्र के साहित्य पर केन्द्रित सम्पादित ग्रन्थ "कलम का योद्धा" पर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रोफ़ेसर सुरेश जी के साहित्य में एक तेवर है जो पाखंडवाद पर करारा प्रहार करता है।

 

अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में ए॰एम॰यू॰ के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर रमेश रावत जी ने कहा कि सुरेश चन्द्र एक प्रतिभाशाली मौलिक सोच रखने वाले निर्भीक बुद्धिजीवी और साहित्यकार हैं। अल्पायु में ही उन्होंने अप्रतिम उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। उनके पाठकों को उनसे बड़ी आशाएँ है। इस अवसर पर शहर के सैकड़ों बुद्धिजीवी साहित्यकार, पत्रकार एवं समाजसेवी उपस्थित थे। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अस्थाना जी के द्वारा किया गया।

 

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