राष्ट्रप्रेम की संवेदना के साथ विद्यार्थी करें शोध: सुनील अम्बेकर

 

समस्त भारतवर्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन की ज़िम्मेदारी शिक्षकों पर है और शिक्षकों के दृढ़ निश्चय के साथ सहभागिता से इस नीति को धरातल पर पूरी कामयाबी के साथ उतारा जा सकता है | यह कहना उचित होगा की नई शिक्षा नीति की सफलता मूल रूप से देश के शिक्षकों के ऊपर ही निर्भर करती है। ये बातें  अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख श्री सुनील अम्बेकर ने दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में आयोजित एक वेबिनार में कही | सीयूएसबी के अध्यापक शिक्षा विभाग, शिक्षा पीठ एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ‘अध्यापक शिक्षा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020‘ विषय पर क्षेत्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया था | पीआरओ ने बताया कि विवि के विवेकानन्द सभागार में आयोजित वेबिनार के मुख्य अतिथि के रूप में श्री सुनील अम्बेकर जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020 के साकारत्मक पहलुओं को साझा किया | इस नीति को सफल बनाने में शिक्षकों की महत्वता को बताते हुए उन्होंने कहा कि वे सशक्त होंगे और उनमें पूर्ण इच्छाशक्ति होगी, तभी हम अपनी राष्ट्रीय शिक्षा के सपने को साकार कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय चेतना को सजग बनाने वाली शिक्षा की अब तक लगातार अनदेखी होती रही है। इस संदर्भ में नई शिक्षा नीति ने बहुत बड़ी पहल की है  जिसने भारतीय ज्ञान सम्पदा को केन्द्रीयता से सम्बोधित किया है। साथ ही साथ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अच्छी शिक्षा तभी हो पाएगी जब हम संवेदना के साथ शोध करें। यदि हम समाज के प्रति संवेदनशील हैं और इसको ध्यान में रखकर शोध करेंगें तभी बड़ा बदलाव आ पाएगा। इसलिए भारतीय चेतना की जड़ों से निकली हुई शिक्षा ही हमें आगामी अध्यापक शिक्षा के लिए बेहतर आधार दे पाएगी। 

इससे पहले अध्यापक शिक्षा एवं नई शिक्षा नीति विषय पर आयोजित वेबिनार का औपचारिक उद्घाटन  दीप प्रज्वलन से हुआ और स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया | इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों  श्री सुनील अम्बेकर एवं  डॉ. चांद किरण सलूजा के साथ  सीयूएसबी के माननीय कुलपति प्रोफेसर हरिश्चंद्र सिंह राठौर, कुलसचिव कर्नल राजीव कुमार सिंह,  डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रोफेसर आतिश पराशर, पदाधिकारीगण, शिक्षकगण एवं छात्र सभागार में मौजूद थे।  

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में दीप प्रज्वलन के उपरांत शिक्षा पीठ के अधिष्ठाता प्रो कौशल किशोर ने सही अतिथियों का स्वागत करते हुए वेबिनार के विषयवस्तु एवं उद्देश्य से सभागार में मौजूद वक्ताओं, प्राध्यापकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को अवगत कराया |  इसके पश्चात सत्र के विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर चांद किरण सलूजा ने अपने व्याख्यान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मूल भावना पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहली बार यह नीति भारतीयता और राष्ट्रीय चेतना की बात करती है। वहीँ अपने अद्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर हरिश्चंद्र सिंह  राठौर ने विश्वगुरू भारत के निर्माण की चर्चा की तथा इसके लिए नीति में अध्यापक शिक्षा के दर्शन को भारतीयता से जोड़ने की बात की। कुलपति महोदय ने कहा कि धर्म और नैतिकता के बिना भारतीय शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने इस संदर्भ में, अध्यापक शिक्षा के पाठ्यक्रम में इससे सम्बंधित विषयवस्तु को समाहित करने की बात कही।  कार्यक्रम के अंत  प्रोफेसर रेखा अग्रवाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन की ज़िम्मेदारी शिक्षा पीठ की सहायक अध्यापिका डॉ कविता सिंह ने बखूबी निभाया | 

उद्धघाटन सत्र के पश्चात् वेबिनार के दो अन्य सत्रों में विशेषज्ञों ने विषय पर अपने विचार साझा किए जिनमें  प्रोफेसर चांद किरण सलूजा, अकादमिक निदेशक, संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान, नई दिल्ली, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा के डॉ० राम शंकर सक्सेना एवं प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहेरा, क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, भुबनेश्वर शामिल थे | वहीँ सीयूएसबी से प्रोफेसर कौशल किशोर एवं प्रोफेसर आतिश पराशर ने दूसरे तथा तीसरे सत्र में अपने विचार साझा किए | दूसरे तथा तीसरे सत्र में धन्यवाद ज्ञापन शिक्षा शिक्षा विभाग के सह प्राध्यापक  क्रमशः डॉ० रवि कांत एवं डॉ० तपन कुमार बसंतिया ने प्रस्तुत किया | 

 

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