विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच जीवन कौशलों का विकास विषय पर सीयूएसबी में वेबिनार

 

दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के सहयोग से शिक्षक शिक्षा विभाग द्वारा "विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच जीवन कौशलों का विकास" विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया। सत्र की शुरुआत विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. रवि कान्त ने कार्यक्रम की रूपरेखा और औचित्य को बताकर कर अतिथि और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए किया। अधिष्ठाता शिक्षा पीठ सह प्रमुख, शिक्षक शिक्षा विभाग, प्रो कौशल किशोर ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए स्कूल स्तर के साथ-साथ उच्च शिक्षा में छात्रों के बीच जीवन कौशल के विकास के संबंध में एनईपी- 2020 के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला | कार्यक्रम में आगे  माननीय कुलपति  प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि देश के आदर्श नागरिक एवं आदर्श व्यक्ति को तैयार करने में शिक्षा के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने में जीवन कौशल के महत्व के बारे में बताया | उन्होंने कहा कि  अधिक से अधिक विभागों की स्थापना कर भारत मे अधिक से अधिक उत्तरदायी और सक्षम नागरिकों का निर्माण किया जा सकता है | उन्होने आगे कहा कि अगर हम 21वीं सदी में भारत की संस्कृति को पूरे विश्व  में विकसित करना चाहते हैं तो हमें जीवन कौशल पर अधिक से अधिक ज़ोर देना होगा।

 

 

प्रो. वेंकटेश सिंह, समन्वयक, आईक्यूएसी सह प्रमुख भौतिकी विभाग ने प्रतिभागियों से मुख्य वक्ता प्रोफ़ेसोर ओम प्रकाश राय का परिचय कराया और विश्वविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मानकों को बनाए रखने के लिए आईक्यूएसी की भूमिका पर चर्चा की। प्रो. ओम प्रकाश राय, पूर्व प्रमुख और डीन, वाणिज्य संकाय, बीएचयू, वाराणसी और पूर्व प्रति-कुलपति, सीयूएसबी  ने प्रतिभागियों के साथ बातचीत की और इस बारे में बात की कि कैसे विश्वविद्यालय के छात्रों के जीवन कौशल (संचार, सहयोग, टीम वर्क और लचीलापन) को लोगों के बीच विकसित किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए, योगाभ्यास करना चाहिए, नकारात्मक विचारों को हटाना चाहिए, आलोचना की आदत को दूर करना चाहिए, टीम वर्क की आदत विकसित करनी चाहिए, टीम लीडर बनने की कोशिश करनी चाहिए और समाज को वापस अच्छा देने के सीखने की जरूरत है | उन्होने कहा कि जीवन कौशल को उनके व्यक्तित्व के लक्षणों के रूप में विकसित करने के लिए अच्छा समय प्रबंधक जो समाज के सतत विकास के लिए आवश्यक है। प्रोफ़ेसर राय ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था और संस्कृति सबसे उत्क्रष्ट है इसलिए इसका ध्यानपूर्वक अध्ययन करने से छात्र अपने जीवन की अधिकांश समस्याओं का समाधान पा सकते है | चूंकि भारत एक युवा देश है इसलिए एक शिक्षक के तौर पर ये विश्वविद्यालय और उसके शिक्षकों के जिम्मेदारी बन जाती है कि हम सबसे जिम्मेदार, संवेदी, न्यायप्रिय युवाओं का निर्माण करें क्योंकि आने वाले समय मे ये युवा ही देश को उन्नति के उत्कर्ष तक लेकर जाएँगे |  

 

 

कार्यक्रम का संचालन और सार  डॉ. प्रज्ञा गुप्ता, सहायक प्रोफेसर, शिक्षक शिक्षा विभाग द्वारा किया गया | अंत में कार्यक्रम समन्वयक, डॉ. तरुण कुमार त्यागी, सहायक प्रोफेसर, शिक्षक शिक्षा विभाग ने धन्यवाद ज्ञपित किया। इस मौके पर प्रो. बृजेश  कुमार, डीन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, प्रो. रेखा अग्रवाल, डॉ. रेणु, डॉ. तपन कुमार बसंतिया, डॉ. मीतांजलि साहू, डॉ. चंद्र प्रभा पांडे, डॉ मुजम्मिल हसन, डॉ. किशोर कुमार, डॉ रवींद्र कुमार, डॉ स्वाति गुप्ता, और डॉ कविता, डॉ मनीष कुमार गौतम, डॉ चंदन श्रीवास्तव और विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य और छात्र-छात्राएं एवं शोधार्थी उपस्थित थे।

 

मुख्य वक्ता के व्याख्यान के बात प्रतिभागियों से बातचीत के लिए प्रश्नोत्तरी सत्र का संचालन शिक्षक शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ संदीप कुमार द्वारा किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता द्वारा प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर दिया गया। शिक्षक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त अन्य विभागों के प्रतिभागियों ने मुख्य वक्ता से अनेक ज्वलंत प्रश्नों के साथ साथ अपने अनुभवों और शंकाओं को भी साझा किया गया जिसका समाधान मुख्य वक्ता द्वारा विभिन्न उदाहरणों द्वारा प्रस्तुत किया गया | 

 

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