अंत्योदय के भारतीय विचार को विश्व मे मनवाने का रास्ता है आत्मनिर्भर भारत -  श्री राम माधव


अंत्योदय का मतलब है ग्रासरूट के स्तर पर वैभव आये इससे देश और समाज मे सम्पन्नता बढ़ेगी और भारत विश्व में अपनी वैचारिकी का लोहा मनवा पायेगा। उक्त बातें 6 नवंबर 2021 दिन शनिवार को दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में 'अंत्योदय की संकल्पना: प्रासंगिकता एवं सार्थकता' विषय पर आधारित एकल व्यख्यान में राष्ट्रीय चिंतक श्री राम माधव ने कही, इस कार्यक्रम की अद्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह ने की। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय श्री राम माधव, माननीय कुलपति कामेश्वर नाथ सिंह, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर आतिश पराशर ने सामूहिक रुप से दीप प्रज्वलन कर किया।

प्रोफेसर आतिश पराशर के स्वागत भाषण अतिथियों का स्वागत कर विषय प्रवेश कराते हुए कहा अंत्योदय की संकल्पना ही एक मात्र रास्ता हो सकता है जिसपर चल कर भारत विश्वगुरु बन सकता है।इस व्याख्यान में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक गण विद्यार्थी एवं अन्य सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन के कार्यकर्ताओं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य माननीय श्री राम माधव जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। अपने उद्बोधन के दौरान भारत विचारको की भूमि है जहां मूल्यों और संस्कारों का जन्म हुआ है। इस संस्कृति की मूल बात- ज्ञान का निरंतर खोज। सर्वे भवन्तु सुखिन, वसुधैव कुटुंबकम् को सार्थक करने के लिए एक उपयुक्त उपागम है- अंत्योदय।श्रीमान राम माधव जी ने बताया कि अंत्योदय का अर्थ है समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का विकास।कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. सुधांशु जा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रविकांत ने किया | 

 

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