केन्द्रीय विश्वविद्यालय में गाँधी जी के 150 वें जयंती वर्ष पर विशेष पखवाड़े का समापन 

गाँधी का आध्यात्म वर्तमान भारत के लिए काफी प्रासंगिक - प्रोफेसर राठौर

  आज देश में अमीरों - ग़रीबों में बढ़ती हुई खाई को कम करना है और अर्थव्यवस्था को स्थिर एवं मजबूत करना है तो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के विचारों पर चलने की अति-आवश्यकता है | गाँधी सचमुच एक महात्मा थे और उन्होंने अभिमान, क्रोध, ईर्ष्या आदि को त्याग कर एक साधारण जीवन व्यतीत किया और देश के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ! गाँधी के जीवन के मूल्यों को समझ कर अगर आम हिंदुस्तानी उन रास्तो पर चलने की कोशिश करे तो उसका जीवन तो सफल होगा ही साथ-ही-साथ देश भी गर्वान्वित होगा ! बेशक महात्मा गाँधी के व्यक्तित्व के राजनितिक पहलु विवादपूर्ण रहा है और वो एक अलग चर्चा का विषय है जिसपे मैं कोई चर्चा नहीं करना चाहता !  लेकिन मैं महात्मा गाँधी को देश ही नहीं बल्कि दुनिया का एक शक्तिशाली मनुष्य के रूप में मानता हूँ इसलिए वे राष्ट्रपिता हैं जिसपे हम सब भारतीयों को गर्व होना चाहिए ! ये बातें दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के माननीय कुलपति प्रोफेसर हरिशचन्द्र सिंह राठौर ने विवि में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के 150 वें जयंती समारोह पर आयोजित विशेष पखवाड़ा के समापन समारोह में कही !  

माननीय कुलपति ने अपने अध्यक्षीय भाषण में महात्मा गाँधी के प्रति अपना विनम्र आदर प्रस्तुत करते हुए उनके जीवन से जुड़े कई पहलुओं को साझा किया ! उन्होंने कहा कि महात्मा के रूप में गाँधी के जीवन का हर अंश बहुत बड़ा सन्देश देता है, चाहे वो अहिंसा का पाठ हो, धर्म एवं जाति के भेदभाव के बिना लोगों के बीच स्नेह एवं प्रेम की भावना हो या भी साफ - सफाई के प्रति उनका लगाव इन चीज़ों से हमें एक आदर्श जीवन जीने का बहुत बड़ा सन्देश मिलता है ! माननीय कुलपति ने सभागार में उपस्थित छात्रों तथा छात्राओं को यह सन्देश दिया 150 वीं जयंती वर्ष के अवसर पर वे अपने जीवन में गाँधीजी की अच्छी आदतों को अपनाएँ और शुरवात अपने आम जीवन में पॉलिथीन के इस्तेमाल को त्याग कर करें तभी उन्हें सच्ची श्रृद्धांजलि मिलेगी !  

समापन समोरह में  मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मगध विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मनीष कुमार सिन्हा ने महात्मा गाँधी के राष्ट्रवाद के परिकल्पना को विस्तार से साझा किया ! उन्होंने कहा कि गाँधी का राष्ट्रवाद समग्रता पर आधारित था जिसमें देश और समाज के हर वर्ग को प्राथमिकता दी गई थी ! गांधी का मानना था कि व्यक्ति के विकास के लिए किसी धर्म को अपनाने की आवश्यकता नहीं है। गांधी ने स्वराज की बात कही लेकिन स्वराज को परिभाषीत नहीं किया। गांधी ने बताया की हम एक विचार पर नहीं जुड़ सकते पंरतु सबके विचारों को एक साथ जोड़ने की आवश्यकता है।  गाँधी एक साधारण परन्तु एक ऊँची सोच के व्यक्ति थे और उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन को जन आदोलन बनाया।  उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज हमें गाँधी को ज़्यादा-से-ज़्यादा  जानने और समझने कि आवश्यकता है।  प्रोफेसर सिन्हा ने यह ज़ोर देकर कहा कि गाँधी के राष्ट्रवाद में कोई छुपी हुई मंशा या आत्म-हित नहीं था जिससे अंग्रेज़ो को उनके सामने झुकना पड़ा और देश को आज़ादी मिली !  

इससे पहले सीयूएसबी के विवेकानंद सभागार में गाँधी की 150 वीं जयंती के समापन समारोह की औपचारिक शुरुवात माननीय कुलपति प्रोफेसर राठौर, मुख्य अतिथि प्रोफेसर सिन्हा एवं समनवयक डॉ० अलोक कुमार गुप्ता द्वारा दिप प्रज्जवलित करके की गई ! इस अवसर पर डॉ० गुप्ता ने अतिथियों को एक पौधा और गाँधी जी की जीवनी पर लिखी पुस्तक भेंट किया ! गाँधी जी के 150 वीं जयंती समारोह के समनवयक के रूप में डॉ० गुप्ता ने पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों का ज़िक्र करते हुए अतिथियों एवं सभागार में उपस्थित प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार प्रकट किया ! इस अवसर पर विवि के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जिसने सबका मन मोह लिया साथ-ही-साथ गाँधी जी के तरह जीवन जीने की प्रेरणा भी दी ! 

शोधार्थी प्रतिका एवं आशुतोष ने गाँधी जी के पसंदीदा भजन ' वैष्णव जन ' को गाकर सभागार के वातावरण को सुन्दर बना दिया, कुमुद एवं स्मृति ने वंदना नृत्य प्रस्तुत किया, एमए के छात्र महेश कुमार ने कविता पाठ किया ! वहीँ रविश रंजन के द्वारा लिखित एवं निर्देशित नुक्कड़ - नाटक हम में हैं बापू ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी !  मन सञ्चालन अभिषेक नयन एवं भव्य श्रेया ने किया ! 150 वीं जयंती समारोह के अंतर्गत रंगोली एवं पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की गई थी जिसमें विद्यार्थियों ने गाँधी जी के जीवन के मूल्यों को खूबसूरती से प्रदर्शित किया था ! माननीय कुलपति ने प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरुस्कृत करके उनको प्रोत्साहित किया ! 

 ज्ञात हो कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार विवि में गाँधी की 150 वीं जयंती के उपलक्ष में स्वच्छता पखवाड़ा मनाया गया। इसके अंतर्गत विवि परिसर में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न तरह के पेड़ लगाए गए एवं कई अन्य कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया था। इन सभी कार्यक्रमों का आयोजन माननीय कुलपति प्रोफेसर हरीशचन्द्र सिंह राठौर द्वारा अनुमोदित ‘गांधी कार्याजंली समिति’ द्वारा किया गया जिसमें डॉ० गुप्ता के साथ अन्य सदस्यगण क्रमशः  डॉ. रवि सुर्यवंशी (सहायक प्राध्यापक, मीडिया विभाग), डॉ० अर्मिता श्रीवास्तव (सहायक प्राध्यापक, लाइफ साइंस), डॉ. नरसिंह कुमार (सहायक प्राध्यापक, साइकोलॉजी) और डॉ० देवनारायण सिंह (सहायक प्राध्यापक, लॉ) का अहम योगदान रहा !  

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