विश्व के सभी समस्याओं का समाधान एकात्म मानववाद दर्शन में निहित है - कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह

 # पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के  अवसर पर "एकात्म मानववाद" विषय पर व्याख्यान का आयोजन

 

दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के विवेकानंद सभागार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के शुभ अवसर पर आयोजित विशिष्ट व्याख्यान "एकात्म मानववाद" का आयोजन किया गया | कार्यक्रम की शुरुआत  दीप प्रज्वलन के साथ साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण करते हुए हुआ |  विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो० कामेश्वर नाथ सिंह ने औपचारिक उद्घाटन के पश्चात  "एकात्म मानववाद" दर्शन के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला |  उन्होंने कहा कि लम्बे समय तक भारतीय चिंतन और दर्शन को दबा कर रखने कि कोशिश की गई जो अनुचित था  | यहाँ तक कि आजादी के बाद भी आयातित पश्चिमी विचारों के आधार पर भारत के विकास की रणनीति अपनाई गई | लेकिन इस धारना से आज विश्व के साथ-साथ भारत की सभी समस्याएं बढ़ती गई है | 

आज पूरा विश्व समाधान के लिये भारत की ओर देख रहा है | ऐसे में पंडित जी द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानववाद दर्शन की प्रासंगकिता बढ़ गयी है | पंडित जी का यह दृढ़ विश्वास था कि भारत की समस्याओं का समाधान भारत की गर्भनाल से निकले हुए चिंतन से ही होगा। प्रो० कामेश्वर नाथ सिंह ने एकात्म मानववाद के दर्शन पर विचार रखते हुए कहा कि यह दर्शन सनातन चिंतन का मूल है शरीर की आंगिक एकता, प्रत्येक अंग की अपनी विशिष्टता के साथ सामूहिक प्रयत्न का उदाहरण देकर उन्होंने एकात्म मानववाद के दर्शन को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने राष्ट्र के विकाश के मूल में व्यक्ति के विकास को केंद्र बिंदु बताया। स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन, स्वस्थ बुद्धि के आधार पर ही जिस प्रकार संपूर्ण व्यक्ति का विकास होता है, उसी प्रकार एक राष्ट्र का भी विकास होता है।



 प्रो० कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि व्यक्ति के सम्यक् विकास से ही राष्ट्र का विकास हो सकता है। व्यक्ति के विकास के लिए उन्होंने पुरुषार्थ चतुष्टय की आधुनिक प्रासंगिकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण संस्थाओं का व्यक्ति के सम्यक् विकास में सबसे अधिक जिम्मेदारी है।  उन्होंने एकात्म मानववाद दर्शन से प्रेरित राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के प्रभाव में अध्ययन अध्यापन को पुनर्चित करने की बात कही। उन्होंने इस अवसर पर छात्र-छात्राओं से अपील की कि वो अपने कर्तव्य पर बल दे और निरंतर प्रयत्नशील बने रहें, कुछ बनने के पढ़ाई ना करें कुछ करने के लिए पढ़ाई करें तब कुछ ना कुछ बन जाएंगे। अंत में उन्होंने महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने एवं उसको अपने जीवन में उतारने के लिए छात्रों का आवाहन कर इस आयोजन के लिए सभी को बधाई दी |


 इस व्याख्यान का आयोजन छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो० आतिश पराशर के मार्गदर्शन पर हुआ। इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ० सुधांशु कुमार झा ने स्वागत और विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम के अंत मे मीडिया विभाग कर सहायक प्राध्यापक, डॉ०  सुजीत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते माननीय कुलपति जी के व्याख्यान का सार प्रस्तुत करते हुए कहा एकात्म मानववाद का दर्शन व्यष्टि में समष्टि की अवधारणा को स्पष्ट करता है। कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग के शोध छात्र शुभम कुमार ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव कर्नल राजीव सिंह, कुलानुशासक प्रो० उमेश कुमार सिंह, जन सम्पर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मो० मुदस्सीर आलम, सहायक कुलसचिव शशि रंजन, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

 

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