सीयूएसबी में हिंदी दिवस एवं हिंदी पखवाड़े का आयोजन 

 

संघ की राजभाषा नीति एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निदेशानुसार प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय में 14 सितम्बर, 2017 को हिंदी दिवस तथा दिनांक 12 सितम्बर, 2017 से 26 सितम्बर, 2017 तक हिन्दी पखवाड़े का आयोजन किया गया। पखवाड़े का आयोजन सम्मलित रूप में विश्वविद्यालय के तीनों परिसरों स्थायी परिसर पंचानपुर, पटना तथा गया में किया गया | हिंदी दिवस कार्यक्रम के दौरान सहायक निदेशक राजभाषा श्री प्रतीश कुमार दास ने सर्वप्रथम राजभाषा हिंदी के संवैधानिक प्रावधानों, अधिनियमों और नियमों की जानकारी दी और सहज बोलचाल की भाषा प्रयोग पर जोर दिया |

इस अवसर पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता डा. सनत कुमार शर्मा ने हिंदी के स्वरुप तथा इसकी बोलियों के बारे में जानकारी दी. समारोह में डा. तपन कुमार बसंतिया, डा. पारिजात प्रधान, डा. योगेश प्रताप शेखर, डा. कविता सिंह, डा.गुलनवाज आज़म, डा. प्रिय रंजन आदि ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे. समारोह के दौरान राजभाषा हिंदी: संघर्ष व समाधान पर भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी. छात्र महेश कुमार प्रथम, अविनाश कुमार, केयरटेकर को द्वितीय तथा विनीत कुमार को तीसरा स्थान मिला.

पखवाड़े के दौरान दिनांक 15 सितम्बर को विनोबा नगर, गया परिसर में विद्यार्थियों हेतु कविता पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में प्रिंस कुमार को प्रथम, कु0 प्रज्ञा को द्वितीय तथा ईशा श्रीवास्तव को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ । इसी श्रृंखला में दिनांक 18.09.2017 को पटना परिसर में स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रभारी समन्वयक, प्रो0 अरूण कुमार सिन्हा, प्रो0 आर.एस. राठौर तथा जनसंपर्क अधिकारी मो0 मुदस्सिर आलम सहित संकायगण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कु0 शिखा रानी, द्वितीय पुरस्कार उत्सव कुमार तथा प्रणव कुमार को तथा तृतीय पुरस्कार आलोक कुमार पाण्डे को प्राप्त हुआ। दिनांक 19.09.2017 को स्थायी परिसर पंचानपुर में टिप्पण-प्रारूपण, राजभाषा प्रश्नोत्तरी तथा काव्य-पाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। दिनांक 26.09.2017 को स्थायी परिसर पंचानपुर में हिन्दी पखवाड़ा का औपचारिक समापन किया गया।

पखवाड़े का समापन आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार व प्रमाण-पत्र प्रदान कर किया गया। कुलपति प्रो0 हरीश चन्द्र सिंह राठौर ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रति कुलपति, प्रो0 ओ.पी. राय, कुलसचिव, डा. गायत्री विश्वनाथ पाटिल तथा परीक्षा नियंत्रक, श्रीमती रश्मि त्रिपाठी के साथ अन्य अधिकारी, कर्मचारी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि हिन्दी पखवाड़े का आयोजन महज़ औपचारिकता नहीं होनी चाहिए बल्कि संघ की राजभाषा नीति के अनुरूप हमें अपने कार्यों में अधिकाधिक हिन्दी का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाषा अभिव्यक्ति और संचार में बाधक नहीं बन सकती और कोई व्यक्ति यदि मातृभाषा में सोचता, समझता और सीखता है तो उसका दूसरी भाषा में अंतरण आराम से कर सकता है और चिरकाल तक वह उसके मनोमष्तिष्क पर छायी रहती है। हम पाश्चात्य संस्कृति और अंग्रेजीयत के इस तरह अनुयायी हो गए हैं कि हम अपनी भाषा को भूलते जा रहे है और अपनी भावी पीढ़ी को भी उसी राह में ढ़केलते जा रहे हैं। उन्होंने इसे उदाहरण देते हुए समझाया कि जापान और जर्मनी जैसे देश इसीलिए इतनी प्रगति कर रहे है क्योंकि वे अपनी भाषा का प्रयोग राजकाज से लेकर दिनानुदिन सभी कार्यों में करते हैं। यदि उन्हें कहा जाय कि पूछे गए सवाल का जवाब अंग्रेजी में दें तो वह कहेंगे कि आप दुभाषिया ले आओ। बहुभाषाविद् होना अच्छी बात है परन्तु अपनी भाषा को भूल जाना और उसका निरादर करना अपराध है। उन्होंने यह भी निदेश दिया कि सभी विजेता आगे से अपना सारा काम हिन्दी में ही करेंगे। अगले वर्ष से पुरस्कार सिर्फ उन्हीं कार्मिकों को मिलेगा जो फाइलों पर टिप्पण व प्रारूपण सबसे ज्यादा हिन्दी में करेंगे। उन्होंने कहा कि हिन्दी के कठिन शब्दों का प्रयोग न कर सरल भाषा का प्रयोग होना चाहिए और तकनीकी शब्द न मिलने पर अंग्रेजी शब्दों को देवनागरी लिपि में ज्यों का त्यों प्रयोग किया जा सकता है। हिन्दी की प्रकृति ही समावेशी है और अन्य भाषा के शब्दों से ही हिन्दी को समृद्ध किया जा सकता है और यही संवैधानिक विचार भी है जो अनुच्छेद 351 में वर्णित है। राजभाषा नीति के अनुरूप हमारी मोहरें, नामपट्ट, कार्यालय आदेश, सूचना आदि द्विभाषी में होनी चाहिए |

 हिन्दी पखवाड़ा के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं के नाम निम्नलिखित हैं:

पुरस्कृत विश्वविद्यालय के कर्मचारीगण

क्रम सं0

नाम

प्रतियोगिता का नाम

पुरस्कार

1

श्री विनोद कुमार, सहायक

टिप्पण व प्रारूपण

प्रथम

2

श्री धीरेन्द्र सिंह, सहायक                

टिप्पण व प्रारूपण

द्वितीय

3

श्री अनिल कुमार, प्रवर श्रेणी लिपिक

टिप्पण व प्रारूपण

तृतीय

4

श्री सागर कुमार वर्मा, प्रवर श्रेणी लिपिक

टिप्पण व प्रारूपण

सांत्वना

5

श्री धनजी प्रसाद, कार्यालय परिचर

टिप्पण व प्रारूपण

सांत्वना

6

श्री धीरेन्द्र सिंह, सहायक

राजभाषा प्रश्नोत्तरी

प्रथम

7

श्रीमती किरण बेला कुजूर, प्रवर श्रेणी लिपिक

राजभाषा प्रश्नोत्तरी

द्वितीय

8

श्री मनीष कुमार, अवर श्रेणी लिपिक

राजभाषा प्रश्नोत्तरी

तृतीय

9

श्री संजीव कुमार रजक

राजभाषा प्रश्नोत्तरी

सांत्वना

10

श्री रत्नेश चंद्र श्रीवास्तव, निजी सहायक         

स्वरचित कविता पाठ

प्रथम

11

श्री सतीश कुमार, निजी सहायक

स्वरचित कविता पाठ

द्वितीय

12

श्री अरूण कुमार, प्रवर श्रेणी लिपिक 

स्वरचित कविता पाठ

तृतीय

13

श्री अविनाश कुमार, अवर श्रेणी लिपिक         

भाषण

द्वितीय

विश्वविद्यालय के पटना व गया परिसर के विद्यार्थियों हेतु अलग-अलग

1

श्री महेश कुमार   

भाषण

प्रथम

2

श्री विनीत चतुर्वेदी, बीएएलएलबी छात्र        

भाषण

तृतीय

3

सुश्री शिखा रानी, पीएचडी की छात्रा

स्वरचित कविता पाठ

प्रथम

4

श्री प्रिंस कुमार, बीएबीएड छात्र      

स्वरचित कविता पाठ

प्रथम

5

श्री रवि कुमार चमन, स्नातकोत्तर छात्र

स्वरचित कविता पाठ

द्वितीय

6

श्री उत्सव कुमार, मास कम्युनिकेशन एंड मीडिया स्टडीज छात्र

स्वरचित कविता पाठ

द्वितीय

7

श्री प्रणव कुमार, एमएससी छात्र      

स्वरचित कविता पाठ

द्वितीय

8

कुमारी प्रज्ञा, स्नातकोत्तर छात्रा        

स्वरचित कविता पाठ

तृतीय

9

श्री आलोक कुमार पाण्डे, एमएससी छात्र       

स्वरचित कविता पाठ

तृतीय

10

सुश्री इशिता श्रीवास्तव, बीएएलएलबी छात्रा

स्वरचित कविता पाठ

सांत्वना

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